Chandrashekhar Azad की ज़मानत की सुनवाई में वे 3 बातें जो जज ने बोलीं

कौन कहता है कि आप विरोध नहीं कर सकते? क्या आपने संविधान पढ़ा है?

प्रियंका गोस्वामी, नई दिल्ली, Nit:
यह शब्द थे न्यायाधीश कामिनी लाउ के, जो उन्होंने कोर्ट में पुलिस को सख्ती से कहे। मामला था भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आज़ाद की ज़मानत याचिका पर सुनवाई का।
चंद्रशेखर आज़ाद को नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। यही नहीं चंद्रशेखर पर लोगों को भड़काने के भी गंभीर आरोप लगे। ऐसे में जब आज तीस हज़ारी कोर्ट में उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई हुई तो पुलिस समेत वकीलों को भी जजों द्वारा खरी खोटी सुननी पड़ी।
यह सख्त बातें सिर्फ पुलिस और वकीलों के लिए नहीं बल्कि हमारे लिए भी एक आई ओपनर की तरह है।

क्या जामा मस्जिद पाकिस्तान में है?

पुलिस ने दरियागंज में चंद्रशेखर के विरोध प्रदर्शन को गलत बताया था। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों के बाहर प्रदर्शन करना गलत है। इसपर न्यायाधीश ने कहा कि लोग कहीं भी शांतिपूर्ण ढंग से अपना प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने फटकार लगाते हुए पुलिस और सरकारी वकील को कहा कि जामा मस्जिद पाकिस्तान में नहीं है, जहां पर प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने पुलिस वालों को डांटते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन तो पाकिस्तान में भी होते हैं। कोर्ट ने कहा,
आप इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं कि जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान में है।

क्या आपने संविधान पढ़ा है?

चंद्रशेखर पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आपत्तिजनक बयान देने के आरोप हैं जिसे वकील जब साबित करने में फेल होते दिखे तो न्यायाधीश फिर सख्त हो गई और कहा,
आपत्तिजनक बयान क्या हैं? अवैध क्या है? मुझे कानून के बारे में बताएं।
उन्होंने कहा कि धरने में, विरोध प्रदर्शन में क्या गलत है? यह संवैधानिक अधिकारों में से एक है। उन्होंने विरोध को संवैधानिक अधिकार बताते हुए वकीलों से सवाल किया,
कौन कहता है कि आप विरोध नहीं कर सकते? क्या आपने संविधान पढ़ा है?
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प्रदर्शन करना किस अपराध की श्रेणी में आता है?

धरना प्रदर्शन को लेकर अदालत ने कहा कि कोई भी प्रदर्शन कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने प्रदर्शन करके कई नेताओं को बड़ा नेता और मुख्यमंत्री बनते देखा है। उन्होंने कोर्ट में पूछा,
प्रदर्शन करना किस अपराध की श्रेणी में आता है?
चंद्रशेखर आज़ाद ने अपने समर्थकों के साथ जामा मस्जिद के पास धरना दिया था। इसके बाद उन्होंने मार्च निकालने की बात कही थी लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। बता दें कि 21 दिसंबर को चंद्रशेखर आज़ाद को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। वे दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

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