AFDWOSE संथा ने Urdu भाषा पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया


ओखला, Nit.  :

एजुकेशन और भाषा पर बेहतरीन कार्य कर रही एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड वेलफेयर ऑफ़ सोसाइटी एंड इन्वरमेंट  (AFDWOSE) संथा ने उर्दू भाषा पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया. यह आयोजन होटल रिवरव्यू के सभागार में आयोजित किया गया.  

कार्यक्रम में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के पूर्व प्रोफेसर खालिद महमूद, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ खालिद मुबश्शिर, मौलाना मुफ्ती रहमतुल्लाह, जामिया हिन्दी विभाग से एसोसिएट प्रोफेसर रहमान मुसव्विर, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आसिफ उमर, डॉ अनिल कुमार और डॉ विवेक दुबे शामिल थे.


कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व प्रोफेसर खालिद महमूद ने उर्दू जुबान पर रोशनी डालते हुए उर्दू जुबान की तरक्की और हिन्दी तथा उर्दू जुबान की आपसी मेल पर रोशनी डाली. प्रोफेसर खालिद ने कहा कि हिन्दी के बगैर उर्दू जुबान अधूरा है तो उर्दू के बगैर हिन्दी जुबान. ये ऐसी जुबान है जिसे पढ़ना बोलना और समझना बेहद ही आसान है.

वही कार्यक्रम में  जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलरो ने उर्दू जुबान में रिसर्च पेपर पढ़ा. जिसमें जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की रिसर्च स्कॉलर कमर जहाँ ने और दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की रिसर्च स्कॉलर मेहर फातिमा ने उर्दू है मेरा नाम, मैं खुसरो की पहेली, मैं मीर की हमराज हूँ, ग़ालिब की सहेली नज्म से अपने रिसर्च पेपर को पढ़ा. इसके अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शोधार्थियों ने भी अपना रिसर्च पेपर पढ़ा. कार्यक्रम में मौजूद सभी रिसर्च स्कॉलर को AFDWOSE संथा ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया.


मंच का संचालन हिन्दी विभाग के प्रोफेसर डॉ रहमान मुसव्विर और उर्दू विभाग के प्रोफेसर डॉ खालिद मुबश्शिर ने किया.


कार्यक्रम  का सफलतापूर्वक समापन के बाद एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड वेलफेयर ऑफ़ सोसाइटी एंड इन्वरमेंट  (AFDWOSE) संथा के जेनरल सेक्रेटरी मोहम्मद जौन ने सभी लोगों को धन्यवाद दिया. 

(Press Release)

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