ग्राम पंचायत का आडिट न कराने वाले Pradhan नहीं लड़ सकेंगे Election

फर्रुखाबाद, Nit. :
जनपद की ग्राम पंचायतों में मनमाने ढंग से विकास कार्य कराकर सरकारी धन खर्च करने वाले प्रधान व सचिव प्रतिवर्ष ऑडिट भी नहीं कराते। इसके बावजूद ग्राम निधि के खातों में करोड़ों रुपये हस्तांतरित कर दिए जाते हैं। इस पर बार ऑडिट न कराने वाले प्रधानों को चुनाव लड़ने से वंचित रहना पड़ सकता है।

पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह ने डीपीआरओ को ग्राम पंचायतों की ऑडिट कराने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा कि केंद्रीय वित्त व राज्य वित्त आयोग की गाइड लाइन में ऑडिट कराना अनिवार्य है। इससे ग्राम पंचायतें परफार्मेंस ग्रांट व राज्य वित्त की ऑडिट अनुशंसा की धनराशि से वंचित न रह जाएं।

सचिव व प्रधानों को अपनी ग्राम पंचायतों का प्रतिवर्ष ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। धनराशि खर्च में आपत्ति आने पर उसे प्रधान व सचिव से वसूली कर जमा कराने को कहा गया है। इसे कैशबुक में भी अंकित कराकर आडिट आपत्ति का शत प्रतिशत अनुपालन कराया जाए।
कहा गया कि ग्राम पंचायत का ऑडिट न होने पर प्रधान को अदेय प्रमाणपत्र न दिया जाए। ऑडिट की आपत्तियों का 20 फरवरी तक निस्तारण करने के आदेश दिए गए हैं।
अधूरे पड़े शौचालय 15 दिन के अंदर पूर्ण करा लिए जाएं। विदित है कि जनपद की 600 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में ऑडिट कराया ही नहीं है।
वहीं एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायतें की जा चुकीं हैं। डीपीआरओ अमित कुमार त्यागी ने बताया कि ऑडिट के लिए ब्लाकों को रोस्टर जारी कर दिया गया है।

ऑडिट न कराने वाले प्रधानों को अदेय प्रमाणपत्र जारी नहीं होंगे। इससे वह चुनाव में प्रतिभाग नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में प्रधानों को पत्राचार भी किया जा रहा है।
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