Cover Story: अलीगढ़ में दर्जनों मजदूर सड़क पर उतरे, भुगतान कराने और घर भेजने की मांग, भूखे मरने की नौबत

अलीगढ़, Nit. :
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सोमवार को लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ीं। दर्जनों मजदूर सड़क पर उतर आए और शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मजदूर कंपनी से उनका भुगतान कराए जाने और घर भेजने की मांग कर रहे थे।
कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन है। वायरस फैलने से रोकने के लिए लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का कहा जा रहा है।
जिले के हरदुआगंज में खातिमपुर पावर हाउस है। यहां पर यूपी सरकार का पावर प्लांट है। इस पावर प्लांट में लगभग तीन हजार मजदूर काम करते हैं। अधिकांश मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के हैं। इसके अलावा यूपी के ग्रामीण इलाकों के भी कई मजदूर यहां काम करते हैं।
फंसे हैं बाहरी राज्यों के मजदूर
लॉकडाउन के बाद कई सारे मजदूर अपने घर लौट गए लेकिन बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के कई मजदूर यहां फंसे हैं। सोमवार को ये सारे मजदूर पावर प्लांट के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कई मजदूरों का कहना था कि उन्हें जनवरी से वेतन नहीं मिला है तो कई को फरवरी के बाद से भुगतान नहीं हुआ है।
भुगतान और घर भेजने की रखी मांग
ठेकेदार का कहना था कि से कंपनियों ने भुगतान नहीं दिया है इसलिए वह मजदूरों को वेतन नहीं दे पा रहा। घंटों मजदूर सड़क पर डटे रहे। मजदूरों की मांग थी कि उनका पूरा भुगतान कराया जाए और उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाए। इधर पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने मजदूरों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे मानने को राजी नहीं थे।
भूखे मरने की नौबत
मजदूरों ने बताया कि उन लोगों के पास जो जमा पूंजी थी वह खत्म हो चुकी है। कई किराए का कमरा लेकर रह रहे हैं। उनके पास किराया देने के लिए भी रुपये नहीं है। उन लोगों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। उन लोगों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही। सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में उन्होंने कहा कि उन लोगों की स्थिति बहुत दयनीय है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें या पहले अपना जीवन देखें।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
डीएम मौके पर पहुंचे और उन्होंने मजदूरों को भुगतान करवाने और घर भिजवाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद मजदूर वहां से हटे। इधर श्रम विभाग की तरफ से कंपनियों को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि मजदूरों की समस्याओं का समाधान कराया जा रहा है।
-एजेंसियां
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