PM National Relief Fund: दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने पीएम केयर्स फंड में दान देने से इनकार किया


नई दिल्ली, Nit. :

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने पीएम केयर्स फंड में अनुदान देने से असहमति जताई है. एम्स प्रबंधन ने पीएम केयर्स फंड के लिए अपने कर्मचारियों के एक दिन का वेतन काटने का फैसला लिया था. इसकी प्रतिक्रिया में एम्स के रेजीडेंट डॉक्टरों के संगठन ‘आरडीए’ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए प्रबंधन से उसके निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. इस समय आरडीए से करीब 2500 से ज्यादा डॉक्टर जुड़े हुए हैं.

एम्स आरडीए के पदाधिकारियों ने मीडिया से हुई बातचीत में कहा, ‘हम हमारे देश और देशवासियों को बचाने की खातिर आखिरी सांस तक ज़िम्मेदारी निभाएंगे. हम में से अधिकतर ने निजी स्तर पर दान भी दिया है. लेकिन यह निर्णय स्वैच्छिक होना चाहिए. इसे थोपा जाना नहीं चाहिए. एक महामारी या आपातकाल के नाम पर लोगों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है. खासतौर पर इस समय स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों के अधिकारों का तो बिल्कुल नहीं.’

प्रबंधन को लिखे एक पत्र में आरडीए ने यह भी कहा है, ‘स्वास्थ्यकर्मी इस समय अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात काम कर रहे हैं, इसलिए उनका वेतन काटने की बजाय उन्हें अतिरिक्त रिस्क अलाउंस का भुगतान किया जाना चाहिए.’ एम्स आरडीए के महासचिव श्रीनिवास राजकुमार ने कहा, ‘कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत पहले से ‘पीएम केयर फंड’ को दान दिया जा रहा है. पूरा देश इस समय दान कर रहा है. लिहाजा बेहतर यही होगा कि चिकित्सकों के दान का सीधा इस्तेमाल देश भर के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहतर पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्युपमेंट्स) और अन्य आवश्यक सुरक्षा सामाग्री खरीदने में किया जाए.’

हालांकि, एम्स प्रबंधन ने रेजीडेंट डॉक्टरों की मांग को ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि चिकित्सकों के पैसों से अस्पताल में सामग्री खरीदने यानी उस दान के आंतरिक इस्तेमाल करने का कोई प्रावधान नहीं है. साथ ही सख़्ती दिखाते हुए एम्स प्रबंधन ने कहा है कि जो भी इस नेक उद्देश्य का हिस्सेदार नहीं बनना चाहता है उसे औपचारिक तौर पर इससे इन्कार करना होगा.

उधर, एम्स की ही तर्ज पर राम मनोहर लोहिया अस्पताल और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के डॉक्टरों ने भी अपनी एक दिन की तनख्वाह को पीएम केयर्स फंड में दान देने पर नाखुशी जाहिर की है.

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