Cover Story: देश के आधे लोगों के पास अगले हफ़्ते नहीं होगा राशन! 67 फ़ीसदी ने गंवाया रोजगार- सर्वे

तस्वीर-अज़ीम प्रेम जी यूनिवर्सिटी के ट्विटर से साभार

रिपोर्ट में दिहाड़ी पर काम करने वालों की कमाई में गिरावट दर्शाते हुए बताया गया है कि लॉकडाउन से पहले की जो साप्ताहिक कमाई थी वो लॉकडाउन के दौरान आधी रह गयी है। लगभग 940 रुपए साप्ताहिक कमाने वाले की कमाई 495 रुपये पर आ गयी है।

ग़ैर कृषि वाले क्षेत्रों में स्व-रोजगार वाले लोगों की साप्ताहिक कमाई लॉकडाउन से पहले और लॉकडाउन के दौरान 90 फ़ीसदी तक गिर गयी है। यदि वह 2240 रुपए की साप्ताहिक कमाई करता था तो वह 218 रुपए हो गयी है

रिपोर्ट में ये भी पता चलता है कि करीब 51 फ़ीसदी लोगों को या तो अपना वेतन कम मिला है या तो नहीं मिला है।

सबसे भयावह स्थिति ये सामने आई है कि करीब आधे (49 फ़ीसदी) लोगों के पास अब एक हफ़्ते की आवश्यक सामग्री ख़रीदने का भी उचित पैसा नहीं है।

सर्वे में बताया गया है कि कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन में कमाई का ज़रिया पहले के किसी भी समय से ज्यादा ख़त्म हुए हैं। और इनसे पार पाने के लिए जो रास्ता अपनाया जाएगा वो धीमा और कठिन हो सकता है। सर्वे करनी वाली टीम के मुताबिक कुछ मार्ग हैं जो हमें इस समस्या में मदद कर सकते हैं।

  • सार्वजानिक वितरण प्रणाली को यूनिवर्सल बना कर राशन को 6 माह तक बांटना चाहिए।
  • 7 हज़ार रुपए की कैश मदद की जानी चाहिए। जिससे अर्थव्यवस्था में मांग वापस लायी जा सके।
  • ज़रूरी दूरी बनाते हुए नरेगा के कार्यों की शुरुआत की जानी चाहिए।
  • मनरेगा के विस्तार, शहरी रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत की ज़रूरत है। यूनिवर्सल बेसिक सर्विसेज में इन्वेस्टमेंट के क़दम उठाए जाने चाहिए।

यह सर्वे आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (पुणे), ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में किया गया है। इस सर्वे में लॉकडाउन के बाद और उसके पहले फ़रवरी के आंकड़ों को आधार बनाया गया है। इसमें दिहाड़ी मजदूर, स्व-रोजगार, नियमित वेतन वाले और वेतनभोगी कर्मचारियों की स्थिति पर अध्ययन किया गया है।

अभी जारी की गयी रिपोर्ट में आने वाले कुछ ही हफ़्तों में इस पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करने को भी कहा गया है। हम उस रिपोर्ट के आने पर आपको अपडेट करेंगे।

New India Times मीडिया से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।
Reactions