गर्भवती की मौत के मामले में DM गौतमबुद्धनगर द्वारा बड़ी कार्यवाही, FIR के न‍िर्देश


गौतमबुद्धनगर, Nit. :

गर्भवती महिला की मौत के मामले में गौतमबुद्ध नगर डीएम सुहास एल.वाई. ने बड़ी कार्यवाही करते हुए जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के पद पर तैनात डॉ. वंदना शर्मा को यहां से स्थानांतरित करने और स्टाफ नर्स राजबाला तथा वार्ड आया अनीता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। इसके अलावा सभी सात निजी अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सीएमओ को उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

गर्भवती की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट सौंपी

आठ अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद इलाज नहीं मिलने से गर्भवती महिला की मौत मामले की रिपोर्ट सीएमओ ने जिलाधिकारी को सौंप दी है। रिपोर्ट में अस्पतालों की गलती सामने आई है। पांच जून को खोड़ा की गर्भवती महिला की मौत हो गई थी।

गर्भवती महिला गाजियाबाद और नोएडा के आठ अस्पतालों में इलाज के लिए भटकी थी, लेकिन कहीं भी इलाज नहीं मिला था। जो महिला की मौत का कारण माना जा रहा है। जिला प्रशासन ने संज्ञान में लेते हुए सीएमओ और एडीएम को जांच सौंपी थी। सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि जांच के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। इस बारे में विस्तृत रूप से जिलाधिकारी ही बता पाएंगे।

एनएचआरसी ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा

एनएचआरसी ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दो महिलाओं के इलाज में लापरवाही के मामले पर संज्ञान लिया है। एनएचआसी ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस कर जवाब मांगा है कि उसने अस्पताल और जिम्मेदार असफसों पर क्या कार्रवाई की गई। एनएचआरसी ने जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों नोएडा-गाजियाबाद के आठ अस्पतालों में एक बीमार गर्भवती 14 घंटे तक इलाज के लिए भटकती रही। कराहती महिला की पीड़ा का अंत तब हुआ, जब शुक्रवार रात एम्बुलेंस में ही उसकी जान चली गई। उसके साथ उस मासूम की जान भी चली गई, जिसने अभी दुनिया ही नहीं देखी थी।

खोड़ा के आजाद विहार में रहने वाली नीलम (30) का टायफाइड का इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह तबीयत खराब होने पर उसे नोएडा ईएसआईसी अस्पताल ले जाया गया। नीलम के पति विजेंद्र सिंह ने बताया था कि वहां भर्ती न किए जाने पर वह नीलम को पहले जिला अस्पताल और फिर फोर्टिस, जेपी, शारदा व ग्रेटर नोएडा के जिम्स ले गए, मगर कहीं भी उसे इलाज नहीं मिला। वहीं गाजियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स से भी मायूसी मिली। तब तक नीलम जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी। इसके बाद परिजन दोबारा जिम्स की ओर चले, मगर इस बीच रास्ते में एम्बुलेंस में ही उसने दम तोड़ दिया।

घटना संज्ञान में आने के बाद गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी सुहास एल.वाई. ने इसे एक गंभीर मामला बताते हुए सीएमओ और एडीएम से इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ा कार्रवाई करने को कहा था। डीएम ने कहा था कि अस्पतालों को संवेदनशील होने की जरूरत है। मरीज को आपात स्थिति में इलाज मिलना चाहिए। सभी अस्पतालों को इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं।
– एजेंसी

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