Cover Story update: फर्रुखाबाद में हिन्दी का (क, ख, ग) तक नहीं जानने वाले पत्रकार की संख्या दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि, अस्सी ग्राम पंचायतों वाले कम्पिल क्षेत्र में करीब 46 कथित पत्रकार लोगों के लिए सिर दर्द बने घूम रहे

•दर्जनों पत्रकार खुल कर कर रहे है दलाली, 

•हद तो तब हो गई जब एक नाबालिग लड़की को भगाने के आरोपी ने थाने में खुद को पत्रकार बताया, 

•अस्सी ग्राम पंचायतों वाले कम्पिल क्षेत्र में करीब 46 कथित पत्रकार लोगों के लिए सिर दर्द बने घूम रहे है, 

•ग्राम प्रधान, कोटेदार, ग्रामीण इलाकों के डॉक्टर व ठेकेदार इनके निशाने पर होते है, 

•खुद को कार्यवाही करने के फ्रेम में समझने वाले ये कथित पत्रकार बन ठनकर टोली बनाकर पहुंचते है, 

•और मीडिया का दबाव बनाकर  हजारों रुपयों की मांग करते है, 

फर्रुखाबाद (कम्पिल) N.I.T. : पत्रकारिता का (क, ख, ग)  तक नहीं जानने वाले पत्रकार की संख्या दिन दुगनी रात चौगुनी वृद्धि होती जा रही है। कौन वास्तव में पत्रकार है और कौन नहीं यह समझना अब बहुत जरूरी हो गया है। वास्तव में देखा जाए तो फर्जी पत्रकारों के कारण वास्तविक पत्रकार भी प्रभावित (बदनाम) हो रहे हैं। जिन्हें दिन प्रतिदिन विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

पत्रकारिता को दलाली बना लेने वाला हुनर अगर आपको देखना है तो जनपद फर्रुखाबाद के कम्पिल कस्बे में देखें जहां बुरी तरह से दलाली में लिप्त है। कुछ कथित पत्रकार थाने से लेकर कोटेदारों, प्रधानों तथा भोली-भाली जनता को अपने जाल में फंसा कर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं और जो इनके जाल में ना फंसे उनके खिलाफ खबर लिखकर उन पर मुकदमा लिखवाने का दबाव बनाते हैं और सोशल मीडिया पर खबर डालकर खबर का रोब दिखा कर पैसा लूट रहे हैं। पत्रकारिता के पेशे को इन तथाकथित पत्रकारों ने कमाई का हथियार बना रखा है। पत्रकारिता की आड़ में दलाली का धंधा चला रहे हैं कुछ कथित पत्रकार, पत्रकार का चोला ओढ़कर पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं।

हद तो तब हो गई जब एक नाबालिग लड़की को भगाने के आरोपी ने थाने में खुद को पत्रकार बताया। अस्सी ग्राम पंचायतों वाले कम्पिल क्षेत्र में करीब 46 कथित पत्रकार लोगों के लिए सिर दर्द बने घूम रहे है। ग्राम प्रधान, कोटेदार, ग्रामीण इलाकों के डॉक्टर व ठेकेदार इनके निशाने पर होते है। खुद को कार्यवाही करने के फ्रेम में समझने वाले ये कथित पत्रकार बन ठनकर टोली बनाकर पहुंचते है और मीडिया का दबाव बनाकर हजारों रुपयों की मांग करते है।

अब सवाल यह है कि दलाली का जाल बिछाने वाले यह कथित पत्रकार पत्रकारिता में टिके कैसे हैं तो दलाली के धंधे में यह कथित पत्रकार क्षेत्र में लूट का कारोबार कर रहे हैं। तथाकथित पत्रकार/दलाल, भोली-भाली जनता से पैसों की उगाही करके लूटे गए धन को आपस में बांट लेते हैं क्षेत्र में तथाकथित पत्रकारों को नटवरलाल जैसे उपनामों से भी जाना जाता है। दलाली और लूट के इस खेल में तथाकथित पत्रकार क्षेत्र के लिए विलेन बन चुके हैं लेकिन इनकी लूट से वास्तविक पत्रकारों की साख क्षेत्र में खराब हो रही है। इन कथित पत्रकारों की एक आदत यह भी है कि अगर कोई व्यक्ति थाने या किसी भी कार्यालय के अंदर जा रहा है तो यह कथित पत्रकार लोग उनके पीछे जाकर उसके प्रार्थनापत्र की एक फोटोकॉपी मांग कर जिस व्यक्ति के खिलाफ होती है उन्हें फोन कर उनसे कहते हैं कि आप के खिलाफ यह शिकायत आई है आप हमसे आकर मिलो मामले को निपटवा दिया जाएगा। जब व्यक्ति इन कथित पत्रकारों से मिलते हैं तो कथित पत्रकार उन व्यक्ति से प्रार्थना पत्र के अनुसार मुकदमे की बात करते हैं और कहते हैं कि अगर मामला निपटवाना है तो रुपए दो हम मामला निपटवा देंगे और आपको कुछ नहीं होने देंगे। जब व्यक्ति रुपए देने को राजी हो जाता है तो फिर कथित पत्रकार कुछ लालची पुलिस से रुपए की सांठगांठ करने की बात करते हैं और कुछ रुपए पुलिस को देकर बाकी सारे रुपए आपस में बांट लेते हैं। और अपराधी व्यक्ति कथित पत्रकारों को रुपए देकर और पत्रकारों के जरिए पुलिस को रुपए देकर बोलते हैं कि ना ही पत्रकार और ना ही पुलिस वाले हमारा कुछ कर सकते हैं। इसी कारण दिन प्रतिदिन अपराध बढ़ता जा रहा है और इन अपराधों को बढ़ाने की वजह सिर्फ और सिर्फ फर्जी कथित पत्रकार हैं।

जब हमने कम्पिल क्षेत्र के इन कथित पत्रकारों से वार्ता की तो क्षेत्र के कथित पत्रकारों ने बताया कि हमने अपना प्रेस कार्ड चार से पांच हजार रुपए देकर बनवाया है जिनका कोई मूल्य नहीं है।

इन सभी पत्रकारों को हिंदी का (क, ख, ग) तक नहीं आता और अपनी-अपनी गाड़ियों पर प्रेस लिखवाए दबंग बनकर घूमते रहते हैं और कुछ लालची डायल 112 नंबर पुलिस वाले इन कथित पत्रकारों का सहयोग करते हैं। वास्तविक पत्रकार अपनी सच्चाई पर रहते हुए इन फर्जी कथित पत्रकारों की ठगाई के कारण आए दिन बदनाम होते रहते हैं।
Reactions