Uttar Pradesh: ग्राम पंचायत चुनाव की तैयारी, 15 सितंबर से वोटर लिस्ट की चेकिंग का काम शुरू

  • यूपी में पंचायत चुनाव फिलहाल टाले जा सकते हैं
  • प्रधानों का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म होगा
  • एक साथ सभी पंचायत चुनाव कराने की रणनीति

लखनऊ, Nit. :

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव 2020 पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है. सूबे में ग्राम प्रधान समेत सभी पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, लेकिन प्रक्रिया के संबंध में कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है. ऐसे में माना जा रहा है कि कोरोना के चलते सूबे में होने पंचायत चुनाव को कुछ महीने के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है.

चुनाव आयोग ने प्रदेश जिले के अफसरों को सतर्क किया है कि पंचायत चुनाव को लेकर प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दें. सूबे के जिन जिलों में कोरोना की स्थिति बेहतर नजर आ रही है, वहां पर 15 सितंबर से मतदाता सूची बनाने का काम शुरू हो जाएगा. आयोग से बुकलेट और प्रपत्र पहले ही भेजे जा चुके. पहले डोर टू डोर सर्वे होगा, बीएलओ गणना कार्ड पर नाम नोट करेंगे, जो पहले से नाम है उनके आधार और मोबाइल नंबर लिए जाएंगे. इसके बाद जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में बचेंगे, उनके नाम फार्म भरवाकर शामिल करे जाएंगे. 

दरअसल उत्तर प्रदेश की 59,163 ग्राम पंचायतों के मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगामी 25 दिसंबर को समाप्त हो रहा है. इसी क्रम में अगले साल 13 जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष और 17 मार्च को क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा हो रहा है. ऐसे में अक्टूबर-नवंबर में पंचायत का चुनाव करवा पाना प्रशासन के लिए काफी मुश्किल है, क्योंकि पंचायत के चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को कम से कम छह माह का समय चाहिए. इसके अलावा सारी तैयारियों के पूरे होने के बाद भी पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के लिए चुनाव आयोग को कम से कम 40 दिन का समय चाहिए. 

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस बार जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी, प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव एक साथ कराएगी. आयोग से जिलों को जो तैयारी कराने के निर्देश दिलवाए गए हैं, वह चारों पदों पर एक साथ चुनाव कराए जाने के क्रम में हैं. इससे साफ जाहिर है कि यूपी में जब भी चुनाव होंगे सभी पदों पर एक साथ होंगे. 

सूबे की पंचायतों का परिसीमन भी है. इसके अलावा जिन ग्राम पंचायतों का पिछले 5 वर्षों में शहरी निकायों में विलय हुआ है उनको हटाकर अब ऐसी पंचायतों के नए सिरे से वार्ड भी तय होने हैं. वोटर लिस्ट का विस्तृत पुनर्निरीक्षण का काम 15 सितंबर से शुरू हो रहा, जिसमें दो से तीन महीने का समय लग सकता है. इसी तरह से अगले साल ही चुनाव की संभावना बनती नजर आ रही है. ऐसे में यूपी सरकार ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म कर ग्राम प्रधान और वार्ड सदस्यों को मिलाकर प्रशासनिक समिति का गठन कर सकती है. इस दौरान मौजदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर उनसे ही गांव में विकास कार्य करवाए जा सकते हैं. 

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