Cover Story: एमनेस्‍टी इंटरनेशनल से भी जुड़ रहे हैं यूपी को जातीय दंगों में जलाने की साजिश के सूत्र

लखनऊ, Nit. :
हाथरस केस की आड़ लेकर यूपी को जातीय दंगों में जलाने की साजिश के सूत्र अब इस्‍लामिक देशों से लेकर एमनेस्‍टी इंटरनेशनल से भी जुड़ रहे हैं।
जांच एजेंसियों के सूत्रों से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वेबसाइट को इस्‍लामिक देशों से फंडिंग मिल रही थी। एमनेस्‍टी इंटरनेशनल संस्‍था से भी इसके कनेक्‍शन पर जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि हाथरस कांड के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर यूपी सरकार ने एक सनसनीखेज दावा किया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन की आड़ लेकर प्रदेश में जातीय दंगे भड़काने और सीएम योगी आदित्‍यनाथ की छवि खराब करने की बड़ी साजिश रची जा रही थी।
दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों ने http://justiceforhathrasvictim.carrd.co/ नामक एक वेबसाइट पकड़ी। इस पर पुलिस से बच निकलने और विरोध करने के तरीकों पर जानकारी दी जा रही थी। साथ ही अपील की जा रही थी कि लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। इनमें ये निर्देश भी दिए जा रहे थे कि दंगा भड़कने पर आंसू गैस के गोलों से और गिरफ्तारी से कैसे बचें।
‘देश भर में विरोध के लिए उकसाया जा रहा था’
इस पूरे मामले में पुलिस ने 3 अक्‍टूबर को आईपीसी और आईटी एक्‍ट की विभिन्‍न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि यह साइट दिल्‍ली, कोलकाता, अहमदाबाद समेत देश के दूसरे हिस्‍सों में विरोध प्रदर्शन और मार्च आयोजित करने के लिए उकसा रही थी। महज कुछ ही घंटों में हजारों की संख्‍या में लोग फर्जी आईडी के जरिए इससे जुड़ गए। इसके बाद यूजर सोशल मीडिया पर हाथरस से जुड़ी अफवाहें और झूठी खबरें पोस्‍ट करने लगे। जैसे ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं, यह वेबसाइट बंद हो गई लेकिन उस पर मौजूद मैटर एजेसियों के पास सुरक्षित है। इनमें फोटोशॉप की हुई कई फोटो, फेक न्‍यूज़ और एडिट किए हुए विजुअल हैं।
‘इस्‍लामिक देशों से मिला था पैसा’
यूपी सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस वेबसाइट को इस्‍लामिक देशों से भारी मात्रा में आर्थिक मदद मिल रही थी। इसके अलावा एमनेस्‍टी इंटरनेशनल संस्‍था से भी इसके कनेक्‍शन पर जांच की जा रही है। यह भी शक है कि सीएए विरोध में शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का इस वेबसाइट को तैयार करने और संचालित करने में हाथ रहा है।
-एजेंसियां
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