Cover Story: महात्मा गांधी से अधिक पारदर्शी भारतीय पिछले दो सौ बरसों में दूसरा कोई नहीं हुआ

अनुवाद-असम्भव गीत

1989 में भारत भवन द्वारा आयोजित विश्व कविता-समारोह में लातीनी अमरीकी कवियों की बड़ी सशक्त उपस्थिति थी: निकानोर पार्रा, रोबर्तो हुआरोज़, अर्नेस्तो कार्दिनाल, नेन्सी मोरेजान और आमेरो अरिजीज़. यह आकस्मिक नहीं था. यह इस बात का एहतराम करना था कि विश्व कविता में तब स्पहानी क्षण था. कार्दिनाल ने एक लम्बा लेख लिखकर उसे संसार का सबसे बड़ा और सशक्त समारोह क़रार दिया था. कविता को मनुष्य का बुनियादी शब्द बताते हुए हुआरोज़ का कहना था कि इस शब्द को अनेक भाषाओं के माध्यम से फैलाना और समझना बहुत ज़रूरी है. उन्होंने गांधी के विचार से प्रेरणा लेते हुए यह कहा कि कविता वह आयाम है जो इतिहास को अतिक्रमित और पराजित करता है.

अभी कुछ काग़ज़ात नबेरते हुए हुआरोज़ के एक छोटे से इटरव्यू का अंग्रेज़ी अनुवाद मिल गया जो उन्होंने ही भेजा था. उस समय कृष्ण बलदेव वैद ने उनकी कुछ कविताओं के अंग्रेज़ी से अनुवाद किये थे जो उस अवसर पर प्रकाशित पुस्तक ‘पुर्नवसु’ में संकलित हैं. उनमें से ये कुछ अंश देखें:

हर व्यक्ति को चाहिए


एक ऐसा गीत जिसका


अनुवाद असम्भव हो.


...

इसीलिए शायद जब


आप सोचते हैं


किसी के बारे में तो


शायद आप उसे


बचा रहे होते हैं.


क्या कोई चीज़ है/ हमें नीचे से उठाये हुए/या बनवा लेती है/हमसे कोई पक्षी यह देखने के लिए/कि हवा है या नहीं/या रचवा लेती है हमसे इक संसार यह देखने के लिए/कि ईश्वर है या नहीं/या पहनवा लेती है/हमसे टोपी यह साबित करने के लिए/कि हम हैं.


अब दोनों कवि हुआरोज़ और अनुवादक वैद साहब दिवंगत हैं. हम उनकी बनायी टोपी पहनकर यह साबित कर रहे हैं कि अभी हम हैं.


गांधी-चर्चा


महात्मा गांधी से अधिक पारदर्शी भारतीय पिछले डेढ़ सौ-दो सौ बरसों में दूसरा कोई नहीं हुआ. उनका सोचा-किया-लिखा सब उपलब्ध है. भारत में उनसे ज़्यादा अभिलेखित व्यक्ति भी कोई दूसरा नहीं हुआ. राजनेता से लेकर सन्त तक, लफंगों से लेकर विद्वान तक, सभी आम तौर पर, कुछ-न-कुछ छुपाते हैं. गांधी इस मामले में अनोखे और अभूतपूर्व थे कि उन्होंने राजनेता, सन्त और विचारक होते हुए कुछ नहीं छुपाया, सब कुछ जगज़ाहिर किया या होने दिया. ऐसे पारदर्शी गांधी की हत्या को लेकर पिछले कुछ वर्षों से तरह-तरह के प्रवाद कुछ शक्तियों द्वारा फैलाये जा रहे हैं. जिनमें उनको देश के विभाजन के लिए ज़िम्मेदार बताना शामिल है, उन सारे साक्ष्यों की पूरी तरह से अवहेलना करते हुए, जो सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध हैं.

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