Hathras case: कोर्ट ने ADG को लगाई फटकार ,कहा- अगर आपकी बेटी होती तो क्या आप बिना देखे अंतिम संस्कार होने देते

नई दिल्ली, Nit. :

हाथरस केस का इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्वतः संज्ञान लिया था, जिसपर सोमवार को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से नाराजगी जताई. कोर्ट ने एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार से कहा कि अगर आपकी बेटी होती तो क्या आप बिना देखे अंतिम संस्कार होने देते? एडीजी लॉ एंड ऑर्डर कोर्ट के इस सवाल पर चुप हो गए. उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था.

हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद बाहर आई पीड़िता के परिजनों की वकील सीमा कुशवाहा ने यह जानकारी दी. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार बोल रहे हैं कि एफएसएल की रिपोर्ट में सीमन नहीं आया है. एडीजी को लॉ की डेफिनेशन पढ़नी चाहिए. पीड़िता के परिजनों की वकील ने एडीजी को रेप की परिभाषा पढ़ने की सलाह दी और कहा कि मेरे पास सारी रिपोर्ट आ चुकी है. उन्होंने कहा कि जज ने जब क्रॉस क्वेश्चन किए, तब प्रशासनिक अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था.

पीड़िता के परिजनों की वकील ने बेहतर की उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरीके से बेंच का और जज का रुख था, लगता है कि एक अच्छा संदेश समाज में जाएगा. उन्होंने कहा कि डीएम को लेकर पीड़िता की भाभी ने कोर्ट को बताया कि इन्होंने कहा था कि अगर आपकी बेटी कोरोना से मर जाती तो आपको इतना मुआवजा नहीं मिलता.

वकील के मुताबिक जज ने इस पर डीएम से सवाल किया कि अगर किसी पैसे वाले की बेटी होती तो क्या आप ऐसे ही हिम्मत करते उसे इस तरीके से जलाने की? जिस तरह से बड़े व्यावसायिक घरानों के लोगों को एक वोट का अधिकार है, वैसे ही दलित और अन्य सभी लोगों को भी वोट का अधिकार संविधान ने दिया है.

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