10 Photo's : बॉर्डर पर पत्थर, बैरिकेड, कंटीले तार और पानी की बौछार, ऐसे किसानों ने की बाधा पार

दिल्ली की तरफ किसानों के बढ़ रहे कदमों को हरियाणा सरकार रोक नहीं पाई। खनौरी में हरियाणा बॉर्डर पर कंटीले तार, मिट्टी के ढेर और जेसीबी से बड़े-बड़े पत्थर लगाए गए थे। उन्हें रोकने के लिए पांच हजार पुलिस कर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान तैनात थे। पंजाब पुलिस भी मौके पर मौजूद थी। 
गुरुवार दोपहर किसानों ने एक साथ जोर लगाकर पत्थरों को हाईवे से हटा दिया। मिट्टी के ढेर को हाथों से सड़क पर बिछाकर रास्ता बना लिया। उन पर पानी की बौछारें की गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए लेकिन किसान आगे बढ़ गए। हरियाणा में करीब एक किमी अंदर जाकर किसानों ने वहीं पर धरना लगा दिया है।

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बुधवार से ही हजारों किसान खनौरी में हरियाणा सीमा पर जुटना शुरू हो गए थे। किसानों को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने सीमा पर आठ स्थानों पर नाके लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया गया था। बॉर्डर पर कंटीले तार, बैरिकेड लगाने के साथ ही जेसीबी से बड़े-बड़े पत्थर रख दिए गए थे।

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गुरुवार को बैरिकेड्स के साथ मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगा दिए गए। दोपहर करीब दो बजे जब किसान खनौरी से हरियाणा की तरफ बढ़े तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए पानी की बौछारें कीं। आंसू गैस के गोले फेंके लेकिन किसान नहीं रुके। कुछ ही समय में किसानों ने सड़क पर रखे पत्थरों को उठाकर खेतों में फेंक दिया और मिट्टी के ढेर को हाथों से सड़क पर बिछा दिया।

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कंटीले तार और बैरिकेड गिराते हुए किसान आगे बढ़ गए और हरियाणा में एक किमी तक अंदर पहुंच गए। मौके पर मौजूद पुलिस बल किसानों को नहीं रोक पाए। हरियाणा में प्रवेश करते ही किसानों ने हरियाणा के किसानों के साथ मिलकर वहीं धरना लगा दिया। पंजाब के प्रसिद्ध सूफी गायक कनवर ग्रेवाल और गायक हर्फ चीमा भी आंदोलन में पहुंचे। दोनों कलाकारों ने कहा कि केंद्र सरकार देश के अन्नदाता के साथ धक्केशाही कर रही है लेकिन किसान इसे किसी सूरत में सहन नहीं करेंगे।

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शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे किसानों को रोकना लोकतंत्र की आवाज दबाना है। भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेशाध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने एलान किया कि किसान नाके नहीं तोड़ेंगे, क्योंकि हिंसक रूप धारण कर संघर्ष करना उनके संगठन की विचारधारा नहीं है। सात दिन के धरने की पूरी तैयारी की गई है। धरने में शामिल महिलाओं के रहने, शौचालय, पुरुषों के लिए प्रबंध, लंगर, बिजली, दवाओं की व्यवस्था की जाएगी। आंदोलन के मद्देनजर यूनियन अपने साथ तीन महीने का राशन साथ लेकर चली है। 

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उधर, बठिंडा से दिल्ली जा रहे हजारों किसानों को हरियाणा पुलिस ने डबवाली सीमा पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इस पर किसानों ने डबवाली सीमा पर पक्का मोर्चा लगा दिया। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेता झंडा सिंह, हरिंदर सिंह, शिंगारा सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को सरकारी तंत्र के जरिये दिल्ली पहुंचने से रोकना चाहती है। किसान आगे ही जाएंगे, पीछे नहीं हटेंगे। किसानों को चाहे कोई भी नाकाबंदी पार करनी पड़े। 

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आंदोलन में शामिल 80 वर्षीय सुखजीत कौर ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को दिल्ली जाने से रोक नहीं पाएगी। चाहे कुछ भी कर ले। बुजुर्ग महिला ने कहा कि सरकार को नहीं पता पंजाब के किसान जुझारू हैं। वह अपना हक लेने के लिए कोई भी कुर्बानी दे सकते है। अब किसान कृषि कानून वापस करवाकर ही घर लौटेंगे।  

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शंभू बैरियर पर किसानों को रोकने के लिए तैनात हरियाणा पुलिस के सारे इंतजाम धरे रहे गए। किसान सारी बाधाओं को पार कर आगे बढ़ गए। किसानों को रोकने के लिए बैरिकेड्स, बड़े-बड़े पत्थर और कंटीले तार लगाए गए थे। पुलिस तैनात की गई थी। किसानों ने बैरिकेड तोड़कर घग्गर में फेंकने शुरू किए तो पुलिस ने आंसू गैस छोड़ दी। पानी की बौछारें शुरू कर दी।

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किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया। उन्हें रोकने के लिए क्रेन भी लगाई गई लेकिन किसान आगे बढ़ गए। बॉर्डर सील होने के कारण लंबा जाम लग गया। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सात घंटे लगे जाम के कारण महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को खासी परेशानी हुई। 
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