किसान आंदोलन में खालिस्तानी आ गए, सीएए आंदोलन में पाकिस्तानी आ गए, हाथरस में नक्सली आ गए,तो हिन्दुस्तानी कहाँ है : Cover Story

'देशभक्ति’ के नाम पर फर्जीवाड़े का आलम ये है कि उसी जनता को उल्लू बनाना हो तो कहो कि जनता ही जनार्दन है. फिर उसी जनता की जेब काटनी हो तो उसे ‘आतंकवादी’ बना दो.
जब आप कहते हैं कि किसान आंदोलन में खालिस्तानी आ गए, सीएए विरोधी आंदोलन में पाकिस्तानी आ गए, हाथरस में नक्सली आ गए, तब आप अपने देश की पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं. अठन्नी में दो ट्वीट करने वाले तक को पता है कि राजधानी में ‘आतंकवादी’ आ गए और भारत की सुरक्षा एजेंसियों को खबर तक नहीं है?
क्या ऐसा कहकर आप पूरे भारत के रक्षा तंत्र का अपमान नहीं करते?
इस देशभक्ति से किसका भला होता है? जनता का? भारत की सुरक्षा एजेंसियों का? देश का? या सिर्फ नेता का?
इन्हीं लोगों के लिए अदम गोंडवी ने लिखा था:
जो ‘डलहौजी’ न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे
कमीशन दो तो हिन्दुस्तान को नीलाम कर देंगे
ये वन्देमातरम का गीत गाते हैं सुबह उठकर
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगुना दाम कर देंगे
सदन में घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे
ये अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे.
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