Farrukhabad की 42 अवार्ड पा चुकीं रिंकी महिलाओं को सिखा रहीं बाइक चलाना

पढा़ई के लिए फर्रुखाबाद के गांव से शहर पहुंचीं सिविल लाइन, गरैया खारे की रिंकी के जज्बे ने महिलाओं को नई राह दिखाने का काम किया है। पौधरोपण, महिला सुरक्षा, मतदाता जागरूकता, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता जैसे विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए 42 अवार्ड पा चुकी रिंकी महिलाओं को सशक्त बनाने की सोचती हैं। यही वजह है कि वह उन्हें बाइक चलाना भी सिखाती हैं।

मूल रूप से मेरापुर क्षेत्र के मनोहर नगर, पिलखना की रिंकी का गांव काफी पिछड़ा कहा जा सकता है, क्योंकि गांव में बेटियों को पढ़ाने में मां-बाप रुचि नहीं लेते थे। शुरुआत से ही मेधावी रहीं रिंकी ने अपने घर वालों से पढ़ाई के लिए जिद की तो उन्हें शहर भेज दिया गया। सिविल लाइन में वह अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ रहकर पढ़ाई कर रही हैं। महिलाओं की दशा से चिंतित रिंकी ने एनसीसी करने के बाद ही ठान लिया था कि महिलाओं के लिए कुछ ऐसा काम करेगी जो उनके लिए मददगार बने। इसके लिए उन्होंने महिलाओं को बाइक चलाना सिखाना शुरू किया। घर वालों ने उनके लिए स्कूटी का बंदोबस्त किया है। रिंकी आत्मरक्षा के लिए भी बालिकाओं को प्रोत्साहित करती रहती हैं। रिंकी खेलकूद में भी आगे रहती हैं। एमएससी कर रहीं रिंकी का कहना है कि सामाजिक ढांचे को मजबूत बनने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना होगा। इसलिए महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा को लेकर हर किसी को आगे आना चाहिए। एनसीसी में भी बेहतरीन कार्यों पर उन्हें प्रशस्ति पत्र मिल चुके हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी सम्मान पा चुकी हैं।
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