Mathura चकबंदी: मथुरा जिला प्रशासन रख रहा है Kisan के बीच खूनी संघर्ष की नींव

मथुरा, Nit. :

तहसील गोवर्धन के राधाकुंड में करीब 24 वर्ष पूर्व चकबंदी पूरी होने के बावजूद आज तक चक परिवर्तन नहीं कराए हैं। चकबंदी और राजस्व विभाग की इस भूल का खामियाजा यहां के किसानों को उठाना पड़ रहा है। यहां अक्सर किसानों के बीच चकों को लेकर विवाद होते रहते हैं। इसकी तमाम शिकायतों पर भी प्रशासन ने न तो यहां चक परिवर्तन कराए हैं और न ही सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटवा सका है।

राधाकुंड में वर्ष 1996 में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण हुई थी। इसे अब करीब 24 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक यहां राधाकुंड के द्वितीय मौजा में चकबंदी में परिवर्तित चकों को बदला नहीं गया है। इसे लेकर यहां अक्सर किसानों में आपसी झगड़े हो रहे हैं। इसके लिए किसानों ने तमाम बार तहसील दिवस, मंगल दिवस, थाने, तहसील से जिला मुख्यालय तक शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन आज तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। विगत दिनों किसान लक्ष्मीकांत पुत्र किशन लाल ने तहसील में यहां चकमार्ग की नापतोल कराने की मांग का प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें उसने लिखा कि यहां 1996 में चकबंदी पूर्ण होने के दौरान डहर क्षेत्र में जलभराव हो जाने के कारण चक परिवर्तन नहीं हो सके थे। इसी के चलते कुछ किसान कम तो कुछ बेहद ज्यादा जमीन जोत बो रहे हैं लेकिन फायदा वही ले रहा है जिसकी लाठी में दम है। इससे कमजोरों का शोषण एवं दबंगों को लाभ मिल रहा है। इन चकों का जल्द ही परिवर्तन कराए जाने की मांग की थी। राजस्व सूत्रों का भी कहना है कि यहां चक परिवर्तन न होने के कारण अक्सर किसानों में विवाद होता रहता है। चक परिवर्तन चकबंदी के बंदोबस्त और राजस्व अधिकारी द्वारा ही संभव है।

किसानों ने जोत लिए गूल, नालियां, चकरोड
चकबंदी के बाद यहां कुछ किसानों ने अपनी जमीन पूरी करने को तो अन्य किसानों ने भी उन्हीं की तर्ज पर चकमार्ग, गूल, नालियां आदि जोत बो लिए थे। इससे यहां किसानों के पास ज्यादा तो किसी के पास कम जगह है। यही अतिरिक्त जमीन यहां विवाद का कारण बनी हुई है। प्रशासन ने भी इन सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटवाने की कभी कोई कोशिश नहीं की।

भूमाफ‍िया की हरकतों से आज़‍िज आए क‍िसान होती लाल बताते हैं क‍ि खतौनी के अनुसार तो हमारे पास अपनी जमीन से भी लगभग 1 बीघा ज्यादा जमीन कब्जा है। इस कारण कुछ भूमाफिया किस्म के लोग हमें खतौनी दिखा दिखाकर परेशान करते रहते हैं। हमारी अक्सर उनसे लड़ाई होती रहती है और कोई सुनवाई भी नहीं करता है।

अपनी ज़मीन को लेकर असमंजस में घ‍िरे किसान भोजराज के अनुसार मेरे खेत के बराबर में चकमार्ग है, लेकिन मुझे नहीं मालूम कितना व कहां है। मेरा कब्जा अपनी जमीन से ज्यादा पर है। मैं उसे छोड़ना चाहता हूं, लेकिन किस ओर से छोड़ूं, कहीं दूसरी ओर का किसान मेरी जमीन को अपनी बताकर कब्जा न कर ले, इसलिए पूरी जमीन को जोत बो रहा हूं।

क्षेत्रीय किसान हरीबाबू ने खतरों के आश्ंका जताते हुए कहा क‍ि चकबंदी पूर्ण हुए 24 वर्ष हो गए, लेकिन आज तक चक परिवर्तन नहीं हुए। इससे यहां आए दिन विवाद होता रहता है। तमाम शिकायतों के बाद भी किसी ने यहां चक परिवर्तन नहीं कराए हैं। इसका खामियाजा यहां किसी दिन खूनी संघर्ष से किसानों को ही भुगतना होगा।

लक्ष्मीकांत ने बताया क‍ि मेरी जमीन के पीछे ही भूमाफिया किस्म के लोगों का खेत स्थित है। वह हमारी जमीन को भी अपनी बताकर अक्सर परेशान करते हैं और खेती नहीं करने देते हैं। इससे हम परेशान हैं और तमात शिकायतें कर चुके हैं। लेकिन न कोई कार्रवाई हो रही और न ही नापतोल हो रही है।

एसडीएम, गोवर्धन राहुल यादव ने पूछे जाने पर बताया क‍ि यह वर्षों पुराना चकबंदी का मामला है। इसमें चकबंदी टीम के बिना राजस्व विभाग कुछ नहीं करेगा। पिछले दिनों यहां पीडब्ल्यूडी की सड़क निर्माण में भी स्टेडियम का यही मामला आया था। एक दो दिनों में ही यहां राजस्व एवं चकबंदी विभाग की संयुक्त टीम स्टेडियम की नापतोल करने आएगी। इसी के साथ यहां के भी चकरोड आदि की पैमाइश कराकर चक परिवर्तन करा दिए जाएंगे।

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