ये देश की सरकार है, देश की संसद, देश के लिए फैसले करती है - Amit Shah

नई दिल्‍ली, Nit. :
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद के भीतर विदेशियों को कोट करने के चलन पर तंज कसा है। शनिवार को लोकसभा में शाह ने कहा कि सदन के भीतर विदेश के अच्‍छे लोगों के कथन यहां पर ‘कोट-अनकोट’ किए जाते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि ‘कोट अच्‍छे हैं लेकिन जब आप पैर में पहनने वाला गहना कान में पहन लेते हो तो अच्‍छा नहीं लगता।’ शाह ने कहा कि ‘जो कोट किए गए, वो हमारे शासन के लिए नहीं हैं। ये उन तीन परिवारों के लिए जिन्‍होंने शासन किया।’

शाह ने आगे कहा, “क्‍या मानवाधिकार कुछ लोगों के लिए सीमित हैं? पाकिस्‍तान से जो देश की शरण में आया, उनके लिए नहीं हैं? कश्‍मीर से जो पंडित भगा दिए गए, उनके लिए नहीं हैं? जो सुधी संत भगा दिए, उनके लिए नहीं हैं? जो वाल्‍मीकि लोग 70 साल से मताधिकार प्राप्‍त नहीं कर सके, उनके मानवाधिकार नहीं हैं? क्‍यों उनके लिए आपके मन में भावनाएं नहीं आतीं क्‍योंकि वो आपका वोट बैंक नहीं हैं। मानवाधिकार को वोट बैंक की नजर से देखना आपका काम है। हम मानवाधिकार को मानवाधिकार की दृष्टि से देखते हैं।”
शाह ने ओवैसी पर भी मारा ताना, आपको समझता हूं…
अमित शाह लोकसभा में पेश जम्‍मू कश्‍मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2021 पर चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्‍होंने AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। शाह ने कहा, “ओवैसी साहब, अफसरों का हिंदू-मुस्लिम में विभाजन कर रहे हैं। आपके मन में सब चीज हिंदू-मुस्लिम है… मैं तो समझता हूं आपको।” उन्‍होंने कहा, “एक मुस्लिम अफसर हिंदू जनता की सेवा नहीं कर सकता या हिंदू अफसर मुस्लिम जनता की सेवा नहीं कर सकता क्या? अफसरों को हिंदू मुस्लिम में बांटते हैं और खुद को सेक्युलर कहते हैं।”

उन्‍होंने आगे कहा, “ओवैसी जी ने कहा कि 2जी से 4जी विदेशियों के दबाव में किया है। उनको पता नहीं है कि ये यूपीए सरकार नहीं, जिसे वो समर्थन करते थे। ये नरेंद्र मोदी जी की सरकार है, इसमें देश की सरकार, देश की संसद, देश के लिए फैसले करती है।”

शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्‍होंने सत्‍ता में रहने पर अनुच्‍छेद 370 को वोट बैंक की राजनीति के चलते खत्‍म नहीं किया। शाह ने कहा, “किसके दबाव में धारा 370 को इतने समय तक चालू रखा? आप 17 महीने में हिसाब मांगते हो, 70 साल तक जब अस्थायी धारा 370 चली उस वक्‍त हिसाब क्यों नहीं मांगते थे? अस्थायी प्रावधान को नहीं उखाड़ा क्योंकि वोट बैंक की राजनीति करनी थी।”
-एजेंसियां
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