UP जल निगम के कर्मचारियों को 5 महीने से नहीं मिला वेतन, मार्च में आई सितंबर, 2020 की सैलरी

•जल निगम कर्मचारियों को 5 महीने से न वेतन, न पेंशन

•15 दिनों से प्रदेश भर में धरनारत हैं कर्मचारी

•सरकार पर हैं 1653 करोड़ रुपए की देनदारी

•यूपी जल निगम को बंद करने की तैयारी

लखनऊ, Nit. : जल निगम कर्मचारी राम सनेही यादव ने कहा कि ''जल निगम के एमडी से साथ बैठक के बाद 1 मार्च को सितंबर, 2020 की सैलरी आई है. अभी अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी महीने की सैलरी बाकी है. जितनी सैलरी तो उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी.

यूपी जल निगम में पिछले पांच महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है, वेतन ही नहीं रिटायर हुए कर्मचारियों को पिछले 5 महीने से पेंशन नहीं दी जा रही है. ऐसे में जल निगम के कर्मचारी काफी परेशान हैं. यूपी में पिछले 15 दिनों से जल निगम के कर्मचारी वेतन के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई होती नजर नहीं आ रही. छठवां महीना लग चुका है लेकिन कर्मचारियों को न वेतन दिया गया है और न ही कोई पेंशन दी जा रही है. 

उत्तर प्रदेश जल निगम संस्थान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राम सनेही यादव ने आजतक से बातचीत में बताया कि ''12 फरवरी को सभी जिलों में एक दिन का धरना दिया था और इस बाबत मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था, 16 फरवरी से जल निगम मुख्यालय पर लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा है. सभी जिलों में भी भोजनावकाश के समय 1 घंटे का धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है.
   यूपी जल निगम के मुख्यालय पर धरनारत कर्मचारी

जल निगम के एमडी साहब ने हमें वार्ता के लिए बुलाया था और कहा था कि हम एक माह के वेतन का प्रबंध कर रहे हैं. आप धरना-प्रदर्शन बंद कर दें. लेकिन हमने कहा कि 6 महीने होने को हैं, हमें कम से कम तीन माह का वेतन दे दीजिए और हर महीने एक महीने का वेतन मिलता रहे तो हम अपना धरना खत्म कर दें. लेकिन इसपर एमडी साहब ने असमर्थता जाहिर कर दी. इसके बाद न उन्होंने हमसे बात की, न हमें बुलाया.

राम सनेही यादव ने आगे बताया कि 'हमारी वार्ता विफल होने के बाद एमडी साहब ने पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर हमें धरना प्रदर्शन से हटाने के लिए कहा. इसके बाद हमारे पास पुलिस आई. हमने कहा अगर वेतन-पेंशन मांगना अपराध है तो हम जेल जाने के लिए तैयार हैं, यहां भूखों मरने से अच्छा है कि जेल चले जाएं, वहां रोटी तो मिलेगी. अंततः हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन को देखकर पुलिस वापस चली गई.
       लखनऊ में जल निगम के धरनारत कर्मचारी

राम सनेही यादव ने कहा कि ''जल निगम के एमडी से बैठक के बाद 1 मार्च को सितंबर, 2020 की सैलरी आई है. अभी अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर, जनवरी, फरवरी महीने की सैलरी बाकी है. जितनी सैलरी आई है वो तो उधारी चुकाने में ही उड़ जाएगी.''

उन्होंने आगे कहा ''जल निगम प्रशासन का सरकार पर 2100 करोड़ रुपए बकाया है, जिसमें से सरकार ने 1653.9 करोड़ रुपए की देनदारी स्वीकारी भी है, 22 फरवरी, 2021 के दिन मुख्यमंत्री ने जल निगम की समीक्षा बैठक में इस पैसे को देने हेतु मुख्य सचिव को निर्देशित किया था. लेकिन अभी तक कोई पैसा प्राप्त नहीं हुआ है. कर्मचारियों  कुल देयताएं लगभग 11 सौ करोड़ हैं. अगर सरकार वो पैसा जल निगम को दे दे तो कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सभी प्रकार की देयताओं का भुगतान हो जाएगा.
             यूपी जल निगम मुख्यालय, लखनऊ

मथुरा में जल निगम ऑफिस के बाहर धरनारत एक कर्मचारी भगवान सिंह सिसोदिया ने वेतन न मिलने के कारण आ रही समस्याओं के बारे में बताया कि ''समस्या तो ये आ रही है कि 5 महीने से वेतन नहीं मिला है, भुखमरी की कगार पर आ गए हैं, उधार देने वालों ने उधार देना बंद कर दिया है. बड़े-बुजुर्गों का इलाज करवाना मुश्किल हो रहा है. बच्चों की फीस नहीं भर पा रहे, एक तरफ कोरोना, दूसरी तरफ लगभग आधे साल से तनख्वाह नहीं मिली. आदमी कहां जाए? कैसे अपने बच्चों का पेट पाले.
       मथुरा में धरना देते हुए जल निगम के कर्मचारी

उत्तर प्रदेश जल निगम संस्थान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष राम सनेही यादव ने कहा ''वेतन के अभाव में इलाज न होने और मानसिक तनाव के कारण कल ही दो कर्मचारियों की मौत हुई है, जिनमें से एक बरेली और एक बाराबंकी के रहने वाले थे. इससे दो-तीन दिन पहले इलाहाबाद की रहने वाली एक महिला कर्मचारी की मौत हो गई. तनख्वाह न मिल पाने के कारण सबके परिवारों में तनाव है. कर्जदार पैसे मांग रहे हैं.

जल निगम के धरनारत कर्मचारियों ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया है कि उन्हें पिछले 5 महीने से तनख्वाह नहीं मिली. छठवां महीना चल रहा है. इसके अलावा 2016 के बाद जो लोग रिटायर हुए हैं उनके रिटायरमेंट के भत्ते भी नहीं मिले हैं. साथ ही साल 2016 से कोई अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली है वो जल निगम प्रशासन द्वारा अवैधानिक रूप से रोकी हुई है. यानी 2016 से जल निगम में अगर किसी कर्मचारी की मौत हुई होगी तो उनके आश्रितों को कोई नौकरी नहीं दी जा रही है. बताया जा रहा है कि जल निगम में 9,500 कार्यरत कर्मचारी हैं, और लगभग 15 हजार पेंशनर्स हैं जिन्हें पैंशन नहीं मिली है.
Reactions