America की कंपनी ने इफ़्तेख़ार आलम को Gift के तौर पर चाँद पर दिया एक एकड़ जमीन

पटना (शबीना सय्यद )इस दुनिया में हर कोई मशहूर होना चाहता है। इस संसार में बहुत सारे लोग हैं , जो अपनी पहचान बनाने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं, लेकिन कुछ ही लोग आसमान की बुलंदियों को छू पाते हैं।
जी हाँ हम बात कर रहे हैं बिहार के उस नौजवान की जिसने चाँद की जमीं को अपने नाम कर देश और अपने परिवार का नाम रौशन किया है।
बिहार में बहेड़ा के रहने वाले 28 वर्ष के युवा इफ़्तेख़ार आलम को गिफ्ट के तौर पर चाँद पर एक एकड़ जमीन मिली है। दरअसल हुआ ये कि इफ़्तेख़ार जिस कंपनी के लिए काम करते हैं ,उन्होंने उनको उपहार स्वरूप इस ज़मीन को दिया है। वो जिस कंपनी के लिए सॉफ्टवेर डेवलप करते हैं उन्होंने उनके काम से खुश होकर यह भेंट की है। उनकी कंपनी चाँद पर ज़मीन की खरीद और बिक्री करती है। इफ़्तेख़ार आलम ने महज़ चार महीनों में लुनार सोसाइटी इंटरनेशनल कम्पनी के पुराने सॉफ्टवेर को अपडेट करके नया किया था, जिससे उनकी कम्पनी बहुत खुश हो गयी और बतौर इनाम उनको चाँद पर जमीन दे दी। उनकी इस उपलब्धि से आलम का परिवार और पूरा बिहार ख़ुशी से झूम रहा है।
इफ्तेखार आलम का जन्म 26 दिसम्बर 1993 को बिहार के बहेड़ा काजियान के एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम फखरे आलम है। इफ़्तेख़ार ने अपनी 12 वीं तक शिक्षा बहेड़ा के महाविद्यालय से ही की। आलम यहां की ग्रामीण आबो हवा में ही पले बड़े, उसके बाद उन्होंने आगे बढ़ने के लिए उदयपुर शहर का रुख किया, उदयपुर के एसएस कॉलेज से उन्होंने बी टेक की डिग्री हासिल की। कम्प्यूटर साइंस में महारथ हासिल करने के बाद उन्होंने साल 2019 में नोएडा में ARS स्टूडियो नाम से एक कम्पनी खोली। इफ़्तेख़ार आलम यहां से अमेरिकन कंपनी आर्टिफिशियल इंडस्ट्रीज़ के लिए काम करने लगे, उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए चाँद पर जमीन खरीद बिक्री का काम करने वाली कंपनी लुनार सोसाइटी इंटरनेशनल ने इनाम के तौर पर चाँद पर एक प्लाट जमीन दी है।
आलम बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं। 2014 में इनके पिता फखरे आलम का दिहांत हो गया था, उनके पिता बहेड़ा निबंधन कार्यालय में काम किया करते थे। आलम के अलावा उनके पांच भाई बहिन और हैं उनका छोटा भाई जिसक नाम फैयाज आलम है। वह भी उनके काम में उनकी मदद करता है साथ ही उनके साथ रह कर MBA की पढाई कर रहा है। अपनी ख़ुशी का इज़हार करते हुए इफ़्तेख़ार ने कहा , अब मेरी खुवाहिश है , कि मैं चाँद पर जाकर अपनी जमीन को देखूं, और वहां कुछ ऐसा करूं जो सबके लिए एक मिसाल हो।
इस खबर की सूचना मिलते ही सभी लोग आलम को बधाइयाँ देने के लिए फ़ोन कर रहे हैं। और कुछ ने तो उनके घर पर जाकर इस कामयाबी की बधाई दी। चाँद पर जमीन मिलने के बाद पूरी दुनिया के लोग अब इफ़्तेख़ार को जान सकेंगें। आलम की मां नाजरा बेगम का भी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है ,उन्होंने कहा मेरे बेटे ने बहुत मेहनत की है यहां तक पहुंचने के लिए। मुझे और मेरे परिवार वालों को उस पर बहुत गर्व है। इफ़्तेख़ार ने बताया उनकी जमीन की कागज़ी कार्यवाही पूरी हो चुकी हैं। आने वाले चार पांच सालों बाद में अपनी जमीन को देखने जाऊंगा। उन्होंने कहा की वो दरभंगा में भी एक सॉफ्टवेर कंपनी खोलेंगें जहां पर बेनीपुर के युवाओं को ट्रेनिंग देकर रोजगार उपलब्ध कराएंगें। उन्होंने कहा अभी भी मेरी कम्पनी में बिहार के कई युवा काम कर रहे हैं।
यहां हम आपको बता दे की सुशांत सिंह राजपूत के बाद इफ़्तेख़ार बिहार के दूसरे व्यक्ति हैं जो चाँद पर जमीन के हक़दार बने हैं।
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