Health pregnancy test: उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को किया चिन्हित

 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया

फर्रुखाबाद, Nit. : गर्भवती व गर्भस्थ शिशु पर कोई आंच न आये, इसके लिए समय समय पर आशा कार्यकर्त्ता के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्र पर बुलाकर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके साथ ही लोगों को परिवार नियोजन की सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। 
जनपद के स्वास्थ्य केन्द्रों के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्दाबाद में शुक्रवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के साथ साथ अन्तराल दिवस मनाया गया।
इस दौरान जिले में अभियान में कोई कमी न रह जाये इसके लिए बनाये गए नोडल अधिकारियों ने सभी सीएचसी का भ्रमण कर सम्बंधित प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को अधिक से अधिक परिवार नियोजन की सुविधा और गर्भवती महिलाओं की जाँच में कोई कमी न रह जाये दिशा निर्देश दिए। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० सतीश चंद्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान केंद्र सरकार की एक पहल है, इसमें हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती की पूर्ण जाँच की जाती है। इसके जरिये पता लगाया जाता है कि कहीं कोई गर्भवती उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में तो नहीं है।

सीएमओ ने कहा कि इस कोविड 19 के दौरान गर्भवती बाहर से आने वाले लोगों से न ही मिले तो अच्छा होगा। अगर मज़बूरी है तो मास्क और सामाजिक दूरी का पालन जरुर करे। इस समय जितना अपने मन को खुश रखे यह उसके और गर्भस्थ शिशु के लिए वेहतर होगा। 

एसीएमओ आरसीएच डॉ० दलवीर सिंह ने कहा कि आगामी 11 जुलाई को विश्व जनसँख्या दिवस मनाया जायेगा, इस दौरान हम लोगों का भरसक प्रयास रहेगा की अधिक से अधिक लोगों को परिवार नियोजन की सुविधा दी जाये। 

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्दाबाद के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ० गौरव यादव ने बताया कि यहाँ 103 गर्भवती का परीक्षण किया गया। इसमें से 20 गर्भवती उच्च जोखिम गर्भावस्था की मिली। जो महिलाएं एचआरपी (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) चिन्हित हुई है, वह संस्थागत प्रसव ही करायें, इसके लिए उनके परिवार को समझाया गया। 

इस दौरान गर्भवती महिलाओं की जाँच कर रहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ० सोनी कठेरिया ने कहा कि अगर किसी महिला को पहले से हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो ऐसे में उसे अपनी गर्भावस्था के दौरान सचेत रहने की जरूरत है। वहीं कई बार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को हाइपर टेंशन की वजह से झटके आने लगते हैं। इसे प्री एक्लेम्शिया कहते हैं। ऐसे में जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो सकती है। वहीं कई बार डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को झटके आने लगते हैं। एक्लेम्शिया का पूरी तरह से इलाज किया जाना चाहिए। 

जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता अतुल गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का भरसक प्रयास रहता है कि किस तरह से जच्चा और बच्चा को सुरक्षित रखा जाये इसके लिए समय समय पर अभियान चलाकर और आशा कार्यकर्त्ता के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए जागरूक किया जाता है। अतुल ने बताया कि जिले में पिछले वित्तीय वर्ष 2020-21 इस अभियान के दौरान 6338 गर्भवती महिलाओं की जाँच की गई जिसमें से 1112 गर्भवती महिलाएं उच्च जोखिम की अवस्था में मिली जिनका इलाज किया गया, और अब तक लगभग 4700 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव भी कराया जा चूका है। 

इस दौरान अपनी जाँच कराने आई खिरिया मुकुंद सिंह निवासी शशिप्रभा 21 वर्षीय ने कहा कि आज हमने अपनी जाँच करा ली है और हमको दवा दी गई है हम अपना प्रसव अस्पताल में ही कराएंगी। इस दौरान, स्टाफ नर्स मोना समिता, तथा गर्भवती महिलाएं मौजूद रहीं।

फर्रुखाबाद संवादाता अब्दुल मुईद खान
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