Kaimganj vaccination: वैक्सीनेशन कराने गए लोगों ने लगाया कर्मचारियों पर धन उगाही का आरोप

वैक्सीनेशन कराने वालों का आरोप है कि इस कार्य में लगे अस्पताल कर्मचारियों ने बाकायदा धन उगाही के लिए लगा रखे हैं अपने दलाल 

कायमगंज/फर्रुखाबाद, N.I.T. : कोविड-19 जैसी महामारी के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार ने लोगों के बचाव के लिए नि:शुल्क वैक्सीनेशन का कार्य युद्ध स्तर पर चलाने का प्रबंध कर रही है। किंतु भ्रष्टाचार व्याप्त होने के कारण इसमें भी रिश्वतखोरी का धुन बड़े पैमाने पर लगता दिखाई दे रहा है। 

आज कायमगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर वैक्सीनेशन का कार्य 10:00 बजे प्रातः शुरू होने से कुछ पहले ही वैक्सीनेशन कराने वालों की भारी भीड़ लाइनों में लग चुकी थी। ठीक 10:00 बजे के दो-चार मिनट बाद  जैसे ही वैक्सीनेशन कक्ष की खिड़की एक महिला कर्मचारियों ने (जिसका नाम प्रीति बताया जा रहा था) आकर खोली। वैसे ही एक युवक हाथ में आधार कार्ड की फोटो कापियों वाला पुलिंदा लेकर आया। उस युवक ने बन्डल प्रीति के हाथों में थमा दिया। जिसे लेकर महिला कर्मी ने उसे अपने हैंड बैग में रख लिया। इस पर लाइन में लगी भीड़ आक्रोशित हो उठी। भीड़ ने जमकर हंगामा काटा। जब शोर-शराबा अधिक होने लगा तो एक अन्य महिला कर्मी वैक्सीनेशन कक्ष से बड़ी तेजी के साथ बाहर निकली। उसने लाइन में लगे लगभग 15 - 20 लोगों के हाथों से आधार कार्ड की छाया प्रतियां लेकर उन्हें अपने कक्ष में प्रवेश करा लिया।  इस पर काफी देर से अपनी बारी का इंतजार कर रहे आगे लाइन में लगे लोगों ने आपत्ति जताते हुए फिर हंगामा किया। जो युवक आधार कार्ड की छाया प्रतियों का बन्डल देने आया था। वह वहां पहुंचे कुछ मीडिया कर्मियों को देखते ही दौड़ता हुआ। अस्पताल परिसर से कहीं भाग गया। उधर वैक्सीनेशन कक्ष से कुछ लोग बाहर निकले।उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अंदर वैक्सीनेशन के नाम पर सौ -सौ रुपए अवैध वसूली की जा रही है। जो लोग बिना किसी आनाकानी के रुपए दे देते हैं। उनके टीका लगा दिया जाता है। जो नहीं देता उसे वापस लाइन में भेज दिया जाता है। इस तरह के आरोप - प्रत्यारोपों के साथ ही कई घंटों तक अस्पताल परिसर में हंगामे की नौबत बनी रही।

आरोप लगाते हुए जरूरतमंदों ने बताया कि भ्रष्टाचार के चलते यहां आए महिला व पुरुष 3:00 बजे तक अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। सौ रुपये न देने पर 4:00 बजे की जगह 3:00 बजे ही रजिस्ट्रेशन तथा वैक्सीनेशन का कार्य बंद कर दिया गया। क्या वास्तव में ऐसे लोग जो हर महीने वेतन के रूप में शासन का धन हजारों रुपए ले रहे हैं। वह सरकार की योजनाओं को पलीता लगाने से आखिर बाज क्यों नहीं आ रहे हैं। विडंबना तो यह है कि जब इस संबंध में जिले के कुछ विशेष जिम्मेदार अधिकारियों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। 

उधर इस भ्रष्टाचार के संबंध में जब अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर शिवप्रकाश से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में जांच के बाद कार्यवाही कर सकते हैं। किंतु यहां भी विडंबना वही है कि जिस अधिकारी तथा वैक्सीनेशन योजना के लिए जिम्मेदार की नाक के नीचे तथा आंखों के सामने अवैध धन वसूली का खेल चल रहा हो और उसे ना सुनाई दे रहा है, और नहीं हो रहा भ्रष्टाचार आंखों से दिखाई दे रहा है। तो भला जन सामान्य को न्याय एवं सुविधा शासन की मंशा के अनुरूप कैसे मिल सकती है। यह अनुत्तरित प्रश्न एक पहेली जैसा बन चुका है।

(रिपोर्टर अमान खान)
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