Eid ul-Fitr 2022: दो साल से बंद पड़ी ईदगाह पर हुई ईद-उल-फितर की नमाज अदा, लोगों ने हाथ उठाकर मांगी अहले-वतन की खुशहाली के लिए दुआ

शव्वाल की पहली तारीख को हर साल ईद मनाई जाती है

•ईद मुस्लिम समुदाय का बड़ा और खास त्योहार माना जाता है

•दो साल से बंद पड़ी ईदगाहों पर ईद-उल-फितर की नमाज हुई अदा

•ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान लोगों ने मांगी अहले-वतन के लिए दुआ

•ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान जगह-जगह पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा

आमिर खान, फर्रुखाबाद/कम्पिल, N.I.T. : उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद के कम्पिल क्षेत्र के गांव निजामुद्दीनपुर (नागा सैयद) की दो साल से सूनी पड़ी ईदगाह पर इस बार ईद-उल-फितर की नमाज अदा की गई। मंगलवार को लगभग दो साल के बाद खुले आसमान के नीचे ईदगाह पर ईद की नमाज अदा की गई। नमाज अदा करने के बाद लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी। 

कोरोनावायरस के चलते भारत सरकार ने सभी धार्मिक स्थलों पर पाबंदी लगा दी थी। जिसके कारण पूरे भारत में दो साल तक लॉकडाउन लगा रहा। दो साल बंद पड़ी ईदगाह पर इस साल ईद-उल-फितर की नमाज निजामुद्दीनपुर (नागा सैयद) की मस्जिद के पैशेइमाम ने अदा कराई। अकीदतमंदों ने नमाज अदा कर अल्लाह से अहले-वतन की खुशहाली के लिए दुआ मांगी। ईद को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। कम्पिल क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के गांवों में जैसे कटिया, समाउद्दीनपुर (समोदिया), इकलेहरा, निजामुद्दीनपुर (नागा सैयद) में इस साल ईद-उल-फितर की नमाज अदा की गई। नमाज के दौरान सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हाथ उठाकर अहले-वतन की खुशहाली के लिए अमन-चैन व भाईचारे की दुआ मांगी। 
कम्पिल क्षेत्र के गांव निजामुद्दीनपुर (नागा सैयद) की बड़ी ईदगाह पर कम्पिल थाना प्रभारी मंगल सिंह मय फोर्स के साथ मुस्तैद रहे। ईद की नमाज पूरी होने के बाद थाना प्रभारी मंगल सिंह ने सभी लोगों से गले मिलकर ईद मुबारकबाद दी। मुस्लिम समुदाय के गांवों की ईदगाहों पर जगह-जगह पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। 
ऐसे ही आज दुनिया भर में ईद का त्योहार मनाया जा रहा है। ईद मुस्लिम समुदाय का बड़ा और खास त्योहार माना जाता है। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, रमजान के महीने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को हर साल ईद मनाई जाती है। मुस्लिम समुदाय में ईद-उल-फितर का खास महत्व है। इसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है। ईद के दिन लोग नमाज पढ़ते हैं और एक-दूसरे को गले लगाया जाता है। ईद को आपसी भाईचारे का त्योहार माना जाता है। 

मुस्लिम घरों में ईद के दिन तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही इस दिन घर के बड़े, छोटों को उपहार देते हैं जिसे ईदी के नाम से जाना जाता है। यूं तो ईद पर हर किसी के घर में खाने के लिए अलग-अलग तरह की चीजें बनाई जाती हैं लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जो ईद के दिन ना बनें तो त्योहार का मजा अधूरा रह जाता है। ईद के दिन इन चीजों के बनने से त्योहार का मजा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। 

आइए जानते हैं ईद के दिन इन पकवानों के बारे में:- 
मीठी सिवइयां- मीठी ईद पर सिवइयां लगभग सभी मुस्लिम परिवारों में बनाई जाती है। मैदे से बनी सिवइयां को दूध में बनाया जाता है। इसमें कई तरह के ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं। 

दूध फेनी- ईद पर सिवइयां और फेनी अच्छे-अच्छों के मुंह में पानी ला देती है। सिवइयों और फेनी में बुनियादी फर्क यह है कि फेनी तार के गुच्छे की तरह होती है। इसे बनाने में ज्यादा मेहनत लगती है। इसे घी में तला जाता है। यह रंगीन भी मिलती है। और भी तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जैसे कि- 
बाकरखानी- ईद पर बनने वाली डिशेज में बाकरखानी भी काफी स्पेशल है। यह मैदे, सूखे मेवे और मावे की बनती है। तंदूर या ओवन में सिकी बाकरखानी को सूखे मेवे, किशमिश और काजू के साथ परोसा जाता है। इसे दूध के साथ भी खाया जाता है। 
अंगूरदाना- अंगूरदाना उड़द की दाल से बनने वाली मोटी बूंदी है। यह मीठी होती है। इसे दूसरे सभी व्यंजनों के साथ परोसा जाता है। 
गाजर का गजरेला- ईद के दिन गाजर का गजरेला भी काफी लोगों के घरों में बनाया जाता है। इसे खाना खाने के बाद सर्व किया जाता है। गजरेला बनाने के लिए गाजर को कद्दूकस करके दूध, चीनी और ड्राई फ्रूट्स के साथ पकाया जाता है। और भी बहुत कुछ बनाया जाता है जैसे के मीठा खाने के बाद चटपटे चने, दही भल्ले भी बनाए जाते हैं। 

कुछ शहरी घरों में तो शीरमाल भी बनाई जाती है। शीरमाल रोटी की तरह होती है मैदे, घी और शक्कर से बनी शीरमाल को मीठी रोटी कहते हैं। शीर का मतलब होता है दूध। बाजार में पहले से तैयार मिलने वाले शीरमाल को मटन व चिकन के गोश्त के साथ भी खाया जाता है। इसका स्वाद बटर में तले पाव जैसा होता है।

रिपोर्टर आमिर खान
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