Shraddha Murder Case: श्रद्धा हत्याकांड के बाद आफताब के धर्म पर छिड़ी बहस, आफताब मुसलमान हैं या हिन्दू, पारसी? जानें क्या है सच्चाई

•श्रद्धा वाकर मुंबई के आफताब के साथ लिव इन में रह रही थी, 
•आफताब ने श्रद्धा की हत्या के बाद उसके शरीर के किये 35 टुकड़े, 
•आफताब पूनावाला के नाम को लेकर उठ रहे सवाल, 
आफताब का परिवार खोजा समुदाय का है, 

दिल्ली, N.I.T. : दिल्ली में दिल दहलाने वाले श्रद्धा हत्याकांड में पुलिस लगातार जंगलों की खाक छान रही है। युवती की बॉडी के कई पार्ट अभी मिले नही हैं। सबसे महत्वपूर्ण उसका सिर नहीं मिला है। महरौली पुलिस को आरोपी की महज 5 दिन की रिमांड मिली है, जिनमें से 1 दिन कल समाप्त हो गया। बाकी बचे 4 दिनों में मृतका के सिर के अलावा बॉडी के दूसरे पार्ट और जिस धारदार हथियार से उसके बॉडी को 35 टुकड़ों में काटा गया था, उसकी बरामदगी भी काफी महत्वपूर्ण है। पांच महीने पहले हुई इस वारदात में पुलिस हरसंभव सबूत इकट्ठा करने में जुटी है, जिससे यह मामला केवल गिरफ्तारी तक ही ना रह जाए। जब कोर्ट में केस जाए तो मजबूती के साथ सारे सबूत पेश किए जा सकें। 

इधर सोशल मीडिया पर आफताब खोजा पूनावाला के नाम को लेकर बहस छिड़ी है। किसी का कहना है कि आफताब मुसलमान है तो कोई उसे पारसी बता रहा है। 

श्रद्धा वाकर के 35 टुकड़े करने वाले लिव इन पार्टनर का पूरा नाम आफताब अमीन पूनावाला है। आफताब का परिवार पहले खोजा जाति का था अब वह मुसलमान हो चुका है न कि पारसी हैं। आफताब का परिवार काफी पहले धर्मांतरण करके मुसलमान बना था। वहीं श्रद्धा वाकर का परिवार कोली समुदाय का है।

अब सवाल उठता है कि ये खोजा समुदाय क्या है? क्या ये भारत के आम मुस्लिमों से अलग होते हैं?
शिया इस्माइली कानून को मानने वाले मुसलमानों का एक समुदाय खुद को खोजा कहता है। कुछ खोजा सुन्नी इस्लाम को भी मानते हैं। इस समुदाय का एक बड़ा वर्ग गुजरात और महाराष्ट्र में रहता है। भारत के बाहर पूर्वी अफ्रीका के कुछ देशों में, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका में भी बसे हुए हैं।
14वीं सदी में हिंदू धर्म से इस्लाम में कंवर्ट हुए खोजा:-
ब्रिटैनिका वेबसाइट के मुताबिक, खोजा एक हिंदू जाति थी। 14वीं सदी में फारसी पीर सदर-अल-दीन ने कई भारतीयों को इस्लाम धर्म में शामिल किया। कुछ को डराया धमकाया गया और कुछ के साथ जबरदस्ती भी की गई। इसमें खोजा जाति के हिंदू भी शामिल थे। ये लोग इस्लाम के शिया इस्माइली संप्रदाय से जुड़े। इसलिए ये आगा खान के अनुयायी माने जाते हैं।

19वीं सदी में भारत में इस्माइली इमामत की स्थापना की गई। इसका मकसद समुदाय को एकजुट और संगठित करना था। इसकी वजह से खोजा मुस्लिमों का एक हिस्सा छिटक गया। इनमें से कुछ इस्ना अशअरी बन गए और कुछ ने सुन्नी अपना लिया।

खोजा समुदाय के बहुत से रिचुअल्स हिंदुओं से मेल खाते हैं। संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में लिखा है कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1866 के अपने एक फैसले में इस्माइली खोजा समुदाय को आधा मुस्लिम और आधा हिंदू माना था। इस समुदाय की कुछ महिलाएं अभी भी स्वामी नारायण की पूजा करती हैं। बच्चों के पैदा होने के छठवें दिन छठी की रस्म की जाती है, जो आमतौर पर मुस्लिमों में नहीं होती।
खोजा महिला की तस्वीर। इसे 1928 में राव बहादुर एम वी धुरंधर ने बनाया था। गौर करने वाली बात है कि इसमें महिला बुर्के या नकाब में नहीं है।

मुस्लिमों में खोजा को एक प्रगतिशील समुदाय माना जाता है। पूरी दुनिया में इनकी संख्या करीब 6.5 लाख बताई जाती है। इसमें करीब 5 लाख लोग भारत में ही रहते हैं। अलग-अलग तरह के बिजनेस में तो ये आगे हैं ही, साथ ही डॉक्टर, इंजीनियर और लॉयर भी बड़ी संख्या में बन रहे हैं।

खोजा समुदाय के ज्यादातर लोग गुजरात के व्यापारी हुआ करता थे:-
आफताब अमीन पूनावाला का परिवार खोजा समुदाय से ताल्लुक रखता है। खोजा समुदाय गुजरात का एक व्यापारी समुदाय से आता है। इस समुदाय के लोगों ने काफी समय पहले इस्लाम को स्वीकार कर लिया था और मुसलमान बन गए थे।

कौन होते हैं खोजा समुदाय के मुसलमान:-
खोजा समुदाय के लोग शिया और सुन्नी दोनों इस्लाम को मानते हैं। हालांकि अधिकांश खोजा समुदाय से कंवर्ट हुए मुसलमान इस्माइली शिया के धार्मिक कानून को मानते हैं लेकिन बड़ी संख्या में खोजा इस्ना अशरी शियों की भी है।

खोजा समुदाय के मुसलमान गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं:-
कुछ खोजा समुदाय के मुसलमान सुन्नी इस्लाम को भी मानते हैं। खोजा समुदाय के मुसलमान सबसे ज्यादा गुजरात में पाए जाते हैं क्योंकि उन्होंने काफी समय पहले यहीं से इस्लाम अपनाया था। यहां से कई परिवार पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में शिफ्ट हो गए, जिसके बाद इनका विस्तार महाराष्ट्र में भी हो गया। खोजा समुदाय के मुस्लिम परिवार पूर्वी अफ्रीकी देशों में भी बसे हुए हैं।

आफताब ने भी सोशल मीडिया पर बताया था अपना धर्म:-
आफताब ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट में भी लिखा था कि वह मुसलमान हो चुका है। एक इंस्टाग्राम यूजर ने उससे उसके नाम को लेकर सवाल किया था कि आप हिंदू हैं या मुसलमान? आफताब ने जवाब दिया था कि मैं पहले हिन्दू था, अब मैं एक मुसलमान हूं।

श्रद्धा के पिता को मुस्लिम के साथ लिव इन में रहना नहीं था पसंद:-
वहीं श्रद्धा के पिता ने भी आफताब के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज कराई है उसमें उन्होंने बताया है कि आफताब मुस्लिम है। उन्होंने तहरीर में लिखा, 'मेरी बेटी ने 2019 में मेरी पत्नी से कहा था कि वह आफताब अमीन पूनावाला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहना चाहती है। मैंने और मेरी पत्नी ने उसे मना किया था। हमने उससे कहा था कि ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि हम हिंदू हैं और कोली जाति के हैं। और लड़का खोजा जाति का हैं और अब वह एक मुस्लिम है।'
5 महीने बाद सुलझी गुत्थी:-
पुलिस के मुताबिक, आफताब ने अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा की हत्या करके लाश को फ्रिज में छुपाकर रख दिया। बॉडी पार्ट्स को एक-एक करके जंगल में अलग-अलग जगह फेंकता रहा। आरोपी ने 1500 किलोमीटर दूर मुंबई से दिल्ली आकर अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा की पहले गला दबाकर हत्या की थी। उसके बाद शव को छुपाने के लिए और खुद को पुलिस से बचने के लिए उसकी बॉडी को पार्ट-पार्ट करके बेरहमी से हत्या कर दी। दिल्ली पुलिस ने इस हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाते हुए पांच महीने बाद आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को हिरासत में लिया। कड़ाई से पूछताछ के बाद मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस अब मृतका श्रद्धा के शरीर के उन टुकड़ों को आफताब की निशानदेही पर ढूंढ रही है, जिन्हें आरोपी ने अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया था। जांच में यह भी सामने आया है कि रोज रात में आरोपी 2:00 बजे शव के टुकड़ों को फेंकने के लिए फ्लैट से निकलता था। उसने शब को खराब होने से बचाने के लिए 300 लीटर का फ्रिज भी खरीदा था।

ऐजेंसी
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